उन्नाव।बाबा मनकामेश्वर सनातन सेवा समिति के तत्वावधान में गौरी गांव में हो रही शिव दीप शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन भागवत भूषण विश्वस्तरीय कथा प्रवक्ता पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि मेरे देश में सनातन में जन्म लेने वाले ही सनातन का विरोध करते नजर आते हैं । तमाम संत धर्माचार्य , आचार्य व संत सनातन को झूठ कहने वालों के पक्ष में खड़े हैं। शास्त्रों पुराणों व सद्ग्रंथो का अध्ययन न करने वाले ही मीडिया में आकर तरह-तरह के मनगढ़ंत बातें कहते हां हम सनातनियों को इनसे सावधान रहना होगा तभी हमारा सनातन व धर्म मजबूत रह सकता है।
आज की संपूर्ण कथा में उन्होंने
“सत्यम शिवम सुंदरम ” व व्रतों के महत्व
की विवेचना की ।
जो सत्य के मार्ग पर चलेगा उसे शिव कृपा मिलेगी भगवान विष्णु ने सत्य बोला तो वह सत्य नारायण हो गए ।ब्रम्हा ने केतकी पुष्प को झूठ बोलने के लिए कहा तो उसे शिव ने उसे श्राप दे दिया इसी लिए अपनी पूजा में न चढ़ने का श्राप दे दिया ।
गाय को झूठ बोलने के लिए कहा तो उसे श्राप दिया इसी लिए उसका दान पूछ से होता है और उसकी परिक्रमा भी पूँछ की तरफ से की जाती है ।
शिवलिंग के प्रादुर्भाव होने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि लिंग का ओर छोर पता लगाने के लिए विष्णु लिंग के नीचे गए और ब्रह्मा हंस का रूप रखकर ऊपर । विष्णु ने सत्य बोला कि लिंग का कोई छोर नहीं मिला सत्य बोलने से विष्णु भगवान सत्यनारायण कहलाए ब्रह्मा द्वारा झूठ बोलने व झूठ का साथ देने वाले केतकी पुष्प को शिव ने श्राप दिया।
गाय को झूठी गवाही बनाने के चलते शंकर ने गौ माता से कहा कि तुम एक रोटी के लालच में झूठ बोली हो इसलिए तुम्हारी परिक्रमा पूछ से होगी और तुम्हारा दान पूछ पकड़ कर होगा। उन्होंने बताया काल भैरव द्वारा ब्रह्मा जी का सिर काट देने के बाद जो खून निकला वह कर्मनाशा नदी कहलाई । इसी लिए कर्मनाशा नदी सत्कर्मों का नाश करने वाली कही गई । उन्होंने अनेक प्रसंगों का उल्लेख करके सत्कर्मों के साथ सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने वाले प्रसंगों को सुनाया ।
शिव पुराण हमें यह संदेश देती है कि जो जैसा कर्म करेगा उसको उसका फल एक न एक दिन भोगना ही पड़ेगा । जो भगवान शिव के बारे में जो झूठ बोलता है और उसके लिए प्रेरित करता है उसको भी दंड वह स्वयं देते हैं ।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा
शिवलिंग की पूजा करते समय के किसी भक्त को यह सोचने की जरूरत नहीं है कि इसमें उनका कौन सा अंग कहां है । उनके पांच मुख हैं किसी भी दिशा में बैठ कर उनकी पूजा की जा सकती है ।
इसकी प्रमाणिकता के लिए उन्होंने ब्रम्हा के शिव के सर को खोजने के प्रसंग को सुनाया । शिव को प्राप्त करने के लिए जीवन में सत्य को ही अपनाना सबसे आसान व सरल उपाय है ।जो सत मार्ग पर चलता है और चलने के लिए प्रेरित करता है तो उसे शिवकृपा प्राप्त होती है उसमें कोई संदेह नहीं । जो सत्य पकड़ेगा उसे शिव जरूर मिलेगा । सभी सनातनियों को पुराणों को जरूर पढ़ना चाहिए इनमें करवा चौथ वट पूजा जैसे व्रतों का महत्व बताया गया है ।
विशिष्ट जनों में पगुरुदेव का आशीर्वाद पूर्व मंत्री रणंजय सिंह धुन्नी भइया , एम एल सी रामचंद्र प्रधान , जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष जी के सक्सेना , ए डी एम सुशील कुमार गौड़ ,के डी त्रिपाठी , आकाश सिंह सनी , आशीष अटल , सदर विधायक प्रतिनिधि प्रखर गुप्ता आदि ने लिया। समिति अध्यक्ष सुंदरलाल बाजपेई, कोषाध्यक्ष सुभाष गुप्ता, निर्भय सिंह लाला, अभय सिंह, विनोद सिंह, अनिल सिंह, उपेंद्र सिंह, डॉ मनीष सेंगर, अखिल गुप्ता आदि व्यवस्थापन में रहे। कथा के बीच सुमधुर भजनों में झूम झूम कर भावविभोर होते हुए हर हर महादेव और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का उद्घोष करते रहे। संचालन आशीष ने किया और मुख्य यजमान अरुण सिंह व उनकी सहधर्मिणी शिखा सिंह ने सबके प्रति आभार जताया। देश के अलग अलग भागों से कथा में बढ़ रही भीड़ को देखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति ने व्यापक व्यवस्थाएं कीं।
